पछतावें का स्टॉक खत्म करें, भविष्य की थाली में आज का स्वाद भरियेअगर किसी रेस्टोरेंट में हम बैठें और वेटर से कहें , एक प्लेट गुजरा हुआ वक्त ले आओ. तो क्या हम उसे खरीद पाएंगे? बिल्कुल नहीं. वक्त दुनिया की इकलौती ऐसी चीज़…
होली संस्मरण : 🌈🌈आपको होली की अनंत शुभकामनाओं के साथ🌈🌈 होली पर सभ्यता की औपचारिकता गई तेल लेने, हमें तो अपनी ‘मस्ती-खोरी’ ही प्यारी हैहोली पर सभ्यता कीआजकल के लड़के सफ़ेद कुर्ते पहनकर, गाल पर दो उंगली गुलाल मलते हैं और ‘हैप्पी होली’ की सेल्फी डालकर समझते हैं कि जंग जीत ली. अरे, इन्हें क्या पता कि असली होली…
स्कूल की पिटाई (क्या आपने कभी खाई है )एक दिन चर्चा के दौरान मेरे बेटे ने मुझसे कहा – आपके समय के शिक्षक बहुत क्रूर होते थे और बहुत मारते भी थे पर सुना है, आप बहुत सीधे-साधे और पढ़ाई…
संस्मरण : सचमुच ऐसी होती थी छोटे शहरों व गांव में रहने वालों के बचपन की दीपावलीदीपावली का त्यौहार हमारे बचपन में सचमुच अद्भुत होता था. आज मॉर्निंग वॉक लेते समय मैं खो गया , राजनांदगांव मे बिताये अपने बचपन के रंगीन लमहों में . सबसे पहले उल्लास…
संस्मरण : आप सौभाग्यशाली हैं या दुर्भाग्यशाली ?लगभग 40 साल पहले , एक दिन , इंदौर के इंजीनियरिंग कालेज में मेरे हॉस्टल का मेरा एक प्रिय मित्र लगभग रोते हुये मुझसे बोला , मैं बहुत दुर्भाग्यशाली हूं। हमेशा हजारों…
संस्मरण : ईश्वर दयालु है या न्यायप्रिय ? संत गोंदवलेकर महाराज के प्रवचन से हुआ निराकरणराजनांदगांव में बचपन से बाल समाज गणेश समिति द्वारा अपने घर के सामने कराये गये महात्माओं के प्रवचन को मैं सुनता रहा। वे महात्मा कहानियों के माध्यम से बहुत सी बातें समझाते…
संस्मरण : जानिये, एक बच्चे ने कैसे समझा संविधान का महत्वबचपन में मैंने 12 वर्ष की उम्र में जब पेपर में पहली बार पढ़ा कि राजनांदगांव जिले के कलेक्टर अरुण क्षेत्रपाल का तबादला हो गया . मैं बेहद आश्चर्य में पड़ गया…
संस्मरण : होते हैं प्रकृति के खेल निराले ! अपने ढंग से लोगों को सबक-सज़ा-पुरस्कार देती हैकल रात भर आंधी तूफ़ान के साथ भारी बारिश हुई . हवाओं की सांए-सांए पूरी रात संगीत की तरह चलती रही . वृक्षों की इस तरह की लगातार सरसराहट वर्षों बाद देखकर…
संस्मरण : अनुभव को प्रणाम करना सीखासिविल इंजीनियरिंग में डिग्री लेकर मैं , पूना में शिर्के सिपोरेक्स ( मल्टीनेशनल कंपनी) में नौकरी के शुरूआती दौर में था। डेढ़ साल के भीतर सन् 1985 के अंत में डिजाइन आफिस से क्वालिटी कंट्रोल, फिर क्वालिटी…